प्रशासनिक संवेदनशीलता की कसौटी पर सुरौली का मुख्य मार्ग मंदिर और श्मशान घाट के जर्जर एवं दलदल रास्ते को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
“आस्था और अंतिम सफर दोनों पर ‘अव्यवस्था’ का ग्रहण।”
संवादाता-पंकज सिंह निषाद इंटरनेशनल मीडिया प्रेस क्लब
उरई (जालौन)। लोकतंत्र में जब आस्था के केंद्र और जीवन की अंतिम यात्रा का मार्ग ही नारकीय बन जाए, तो जनता की उम्मीदें सीधे प्रशासनिक चौखट पर जाकर टिकती हैं। कुछ ऐसा ही मामला जालौन जिले से सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत सुरौला के मजरा सुरौली के ग्रामीणों ने अपनी बुनियादी और धार्मिक आवश्यकताओं के लिए जिलाधिकारी (जालौन) से गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने एक स्वर में देवस्थल भोले बाबा मंदिर, बजरंगबली मंदिर और यमुना तट स्थित श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग के नवनिर्माण की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में दर्ज दर्द प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर और श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता इस समय अत्यंत दयनीय और बदहाल स्थिति में है। इस मार्ग की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित समस्याओं से ग्रस्त है-कंटीले बबूलों का अंबार,पूरे रास्ते पर कटीली झाड़ियां और बबूल के वृक्ष उग आए हैं, जिससे राहगीर आए दिन चोटिल होते हैं।
बजबजाती नालियां और दलदल-गांव की नालियों का प्रदूषित, बदबूदार और दूषित जल इसी मार्ग पर जमा हो रहा है, जिसने पूरे रास्ते को एक संक्रामक दलदल में तब्दील कर दिया है। श्रद्धालुओं और शवयात्राओं की फजीहत-इस नारकीय स्थिति के कारण जहां एक ओर श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए बाबा शिव और हनुमान जी के मंदिर तक पहुंचने में भारी कठिनाई होती है, वहीं दूसरी ओर किसी ग्रामीण की मृत्यु हो जाने पर अंतिम संस्कार के लिए शव को यमुना तट श्मशान घाट तक ले जाना एक बेहद कड़े और अपमानजनक इम्तिहान जैसा हो गया है। राजस्व पैमाइश और खड़ंजे की मांग-ग्रामीणों ने केवल समस्या ही नहीं उठाई, बल्कि प्रशासन को इसका स्पष्ट और विधिक समाधान भी सुझाया है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि”गाटा संख्या-47, सुरौली दीवारा की राजस्व विभाग की टीम से तत्काल पैमाइश कराई जाए। इसके बाद मार्ग के दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण हो ताकि जलभराव रुके, और मुख्य मार्ग पर खड़ंजे (इंटरलोकिंग/सीसी रोड) का निर्माण कराकर आमजन को सुरक्षित आवागमन की सुविधा भी दी जाए।” इस ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी के साथ-साथ उपजिलाधिकारी (SDM) एवं खंड विकास अधिकारी (BDO) को भी भेजी गई है, ताकि अंतर्विभागीय समन्वय से कार्य जल्द पूरा हो सके।
समय पर समाधान नहीं तो ‘मौन धरना’ और ‘अनशन’ की चेतावनी। ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। अपनी जायज मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो समस्त पीड़ित ग्रामवासी लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण मौन धरना और अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।आमजन का विश्वास बहाल करने की अपील
ग्रामीणों ने बेहद सधे हुए शब्दों में प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि बाबा शिव, हनुमान मंदिर और श्मशान घाट जैसे संवेदनशील व आवश्यक स्थलों तक मार्ग का तत्काल निर्माण कराया जाना जरूरी है। इससे न केवल ग्रामीणों की समस्या दूर होगी, बल्कि आमजन का स्थानीय प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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