अशरफुल मदारिस, गडियाना का 36वां सालाना जलसा “अशरफुल अंबिया कॉन्फ्रेंस
कानपुर, 1 फरवरी मदरसा अल-जामिया अल-इस्लामिया अशरफुल मदारिस, गडियाना का 36वां सालाना जलसा “अशरफुल अंबिया ﷺ कॉन्फ्रेंस व जश्न-ए-दस्तारबंदी” बहुत ही सादगी और शान के साथ आयोजित हुआ। इस मौके पर 40 छात्र-छात्राओं को फ़ज़ीलत, हिफ़्ज़ और क़िराअत की सनदें दी गईं, साथ ही साफ़ा और जुब्बा पहनाकर दस्तार से नवाज़ा गया।
जलसे में मौजूद उलेमा, मशाइख, ख़ुतबा, तक़रीर करने वाले, इमाम और मदरसा मुदर्रसीन ने मुश्तर्का तौर पर आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कोई भी आतंकवादी इस्लाम का वफादार नहीं हो सकता। हर तरह की आतंकवादी सोच निंदनीय है, चाहे वह कलमा पढ़ने वाला हो या न पढ़ने वाला। मॉब लिंचिंग चाहे भारत में हो या बांग्लादेश में, हर हाल में इंसानियत के ख़िलाफ़ है।
अपने सदारती खिताब में मदरसे के सरबराह-ए-आला मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने कहा कि इस्लाम ने विरासत के मामले में पूरा इंसाफ़ क़ायम किया है। कुरआन व सुन्नत की रौशनी में बेटियों और बहनों को उनके हक़ से महरूम करना बड़ा गुनाह और शरीअत के ख़िलाफ़ है, इसलिए पिता की जायदाद में बेटियों और बहनों को उनका पूरा हक़ देना चाहिए।
कछौछा शरीफ़ से तशरीफ़ लाए ख़ास मेहमान शैख़-ए-तरीक़त हज़रत मौलाना शाह सैयद मोहम्मद जलालुद्दीन अशरफी जिलानी ने कहा कि यह दौर इल्म और क़लम का दौर है। इस्लाम इल्म हासिल करने पर ज़ोर देता है। पैग़म्बर-ए-इस्लाम पर नाज़िल होने वाली पहली आयत “इक़रा” भी तालीम से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में तालीम का शौक़ पैदा करें और इल्म पर दिल खोलकर ख़र्च करें, क्योंकि ज़रूरी इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है।नौजवान आलिम मुफ़्ती मोहम्मद क़ासिम मिस्बाही अशरफी ने छात्रों से कहा कि वे इस इरादे के साथ मदरसे से निकलें कि वे इस्लाम के सच्चे नुमाइंदे बनेंगे, सब्र और अख़लाक़ से हालात का सामना करेंगे और अपने अमल से समाज की रहनुमाई करेंगे।कॉन्फ्रेंस के ख़ास मेहमान अदनान राफ़े साहब फ़ारूक़ी, इरशाद आलम साहब और अन्य मेहमानों का ज़ोरदार स्वागत किया गया। जलसे की शुरुआत तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई क़ारी कलीम नूरी, यूसुफ़ रज़ा कानपुरी, जमील ख़ैराबादी, साबिर फ़रीदी और मोहम्मद हसन शिबली ने नात पेश की।
मौलाना खुर्शीद आलम ने निज़ामत के फ़र्ज़ अंजाम दिए। देश में अमन-ओ-अमान, तरक़्क़ी और ख़ुशहाली की दुआ पर जलसे का समापन हुआ इस अवसर पर प्रमुख रूप से हाजी सैयद खुर्शीद आलम, मौलाना सैयद मोहम्मद अकमल अशरफी, मुफ्ती इलियास खान नूरी,मौलाना महताब आलम मिस्बाही, डॉक्टर नासिर खान, मुफ्ती मोहम्मद कासिम मिस्बाही, मौलाना मुर्तजा शरीफ़ी,मुख्तार खान वारसी, हाजी अबरार अहमद, सैयद अतहर अली,कारी मोहम्मद अली अशरफी आदि भारी तादाद में लोग मौजूद रहे!

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