चांदी में उछाल से ज्वेलर्स परेशान, सप्लाई संकट ने बढ़ाई चिंता
कानपुर नगर उपदेश टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर से जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। अखिल भारतीय स्वर्णकार विकास परिषद के अध्यक्ष पुषेंद्र जायसवाल ने बताया कि यदि चांदी और महंगी होती है तो इसका सीधाअसर टेक्नोलॉजी, टीवी, सोलर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस समय फिजिकल चांदी की उपलब्धता बेहद सीमित हो गई है। कॉमेक्स, एलबीएमए और शंघाई समेत विश्व के प्रमुख बाजारों में स्टॉक लगातार घट रहे हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ स्थानों पर केवल 30 से 45 दिनों की डिलीवरी वाली चांदी ही शेष बची है। यदि बड़े परसेंटेज ट्रेडर्स द्वारा फिजिकल चांदी की मांग बढ़ाई जाती है, तो कीमतें और कहां तक जाएंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।पुषेंद्र जायसवाल ने जानकारी दी कि 1 जनवरी 2026 से चीन ने चांदी के निर्यात पर लाइसेंस सिस्टम लागू कर दिया है। इसके तहत अब हर कंपनी चांदी का निर्यात नहीं कर सकेगी, केवल सरकारी मंजूरी प्राप्त कंपनियों को ही अनुमति मिलेगी। इससे छोटे और मिड साइज एक्सपोर्टर्स या तो बाहर हो जाएंगे या उनकी भूमिका बेहद सीमित रह जाएगी।
उन्होंने कहा कि भले ही यह कदम प्रशासनिक तौर पर नियंत्रण का बताया जा रहा हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि चीन दुनिया की लगभग 60 से 70 प्रतिशत चांदी सप्लाई चेन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है। माइनिंग, रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट—तीनों स्तरों पर चीन की मजबूत पकड़ होने के कारण वैश्विक बाजार पर इसका गहरा असर पड़ना तय है।
परिषद अध्यक्ष ने सभी व्यापारी भाइयों से अपील की कि इस समय संयम और समझदारी से व्यापार करें, अधिक लालच में आकर जोखिम न उठाएं, क्योंकि आने वाले समय में चांदी के बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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