सहेलियों को जागरूक करके बाल विवाह रुकवाने में बालिकाओं की भूमिका अहम – नवीन दीक्षित
जी जी आई सी पुखरायां में आयोजित हुई बाल विवाह निषेध संगोष्ठी
प्रधानाचार्य कामिनी पाल एवं डाक्टर अर्चना मिश्रा ने किया जागरूक
कानपुर देहात।
बाल विवाह अधिनियम यह अधिनियम 1 नवंबर, 2007 से लागू हुआ और बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929 का स्थान लिया।
लड़की के लिए 18 वर्ष और लड़के के लिए 21 वर्ष में विवाह की न्यूनतम उम्र सीमा निर्धारित है बाल विवाह को बढ़ावा देना दंडनीय अपराध है, जिसमें 2 साल तक का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। उक्त बात मीना मंच के मास्टर ट्रेनर विधि स्नातक नवीन कुमार दीक्षित ने जी जी आई सी पुखरायां में बालिकाओं को बाल विवाह निषेध संगोष्ठी में सम्बोधित करते हुए कही।
मास्टर ट्रेनर डाक्टर अर्चना मिश्रा ने कहा कि ने कहा कि बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाने नागरिक चाइल्डलाइन 1098 या संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह की सूचना दे सकते हैं, और शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। यह अधिनियम बाल विवाह को रोकने और उससे प्रभावित बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने में एक महत्वपूर्ण कदम है,
आगंतुकों का आभार प्रदर्शन करते हुए उक्त विद्यालय की प्रधानाचार्य कामिनी पाल ने कहा कि भारत में लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को भरपूर बढ़ावा मिलता है। इस अवसर पर शिक्षक एवं बच्चों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

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