ख़ून के आंसू रो रहा किसान
इस मौसम की बरसात ने,
किया बहुत बड़ा नुक्सान ।
आंधी पानी के झोंकों से,
ख़ून के आंसू रो रहा किसान।
ख़ून के आंसू रो रहा किसान,
धान की फसल हुई चौपट।
गिरा पौध जो खड़े धान का,
वह न लांघेगा घर की चौखट।
लोट गया जमीन पर जो गन्ना,
घटे विकास होगा नौ टेढ़ा ।
जान की आफत बना वह,
कटनी छिलनी सब होगा रेढा।।
– हरी राम यादव
अयोध्या
7087815074

आदमी को आदमी से डर लगता है
आया होली का त्यौहार
शंकरत्व के बिना सब निर्मूल है
देश के मजबूर किसान
मैं मजदूर हूं