अंबेडकर नगर के अमर बलिदानी सिपाही धनुषधारी सिंह, वीर चक्र (मरणोपरांत)
कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों के वेष में भारत पर आक्रमण कर दिया। भारत सरकार ने भी युद्ध की घोषणा कर दी। सिपाही धनुष धारी सिंह की पलटन को भी युद्ध भूमि में जाने का आदेश मिला। महज 01 साल 04 महीने की सेना की नौकरी और 20 साल 04 महीने की उम्र में अम्बेडकर नगर के इस वीर ने वह कर दिखाया जिसे किसी को उम्मीद नहीं थी।
25 /26 फरवरी 1948 की रात को 3 पैरा के दो सेक्शन आगे बढ़ रहे थे। सिपाही धनुषधारी सिंह सबसे आगे और बायीं ओर चलने वाले सेक्शन में थे इस सेक्शन की कमान सूबेदार सावन सिंह के हाथों में थी। यह सेक्शन हेंडन रिज पर स्थित दुश्मन पर आक्रमण करने के लिए आगे बढ़ रहा था। आगे बढ़ते हुए इन दोनों सेक्शनों पर अचानक दुश्मन की ओर से मीडिएम मशीनगनों और राइफलों से भयानक गोलीबारी की जाने लगी। दुश्मन की ओर से की गयी इस भयानक गोलीबारी में सिपाही धनुषधारी सिंह के सेक्शन के बारह जवान हताहत हो गये। अपने साथी सैनिकों को हताहत होते देख सिपाही धनुषधारी सिंह का खून खौल उठा। सिपाही धनुषधारी सिंह आगे बढ़े और अपनी ब्रेन गन को एक चट्टान के पीछे रखकर दुश्मन की स्थिति पर सटीक भीषण फायरिंग करने लगे। सिपाही धनुषधारी सिंह द्वारा की जा फायरिंग से सूबेदार सावन सिंह को मौका मिल गया और वे अपने हताहत जवानों को वहां से पीछे ले जाने में कामयाब रहे । साथ ही साथ सूबेदार सावन सिंह ने अपने पीछे वाले सेक्शन के जवानों को पुनः पुर्ननियोजित किया। सिपाही धनुषधारी सिंह दुश्मन से अपने साथियों का बदल लेने के लिए उद्वेलित हो उठे। वाह कुहनी के बल रेंगते हुए आगे बढ़े और दुश्मन पर भीषण फायरिंग करने लगे। सिपाही धनुषधारी सिंह की सटीक और भीषण फायरिंग से दुश्मन सैनिकों के हौसले पस्त हो गये।
सिपाही धनुषधारी सिंह वीरता और कर्तव्यपरायणता का परिचय देते हुए अपने दम पर आगे बढ़ते रहे और दुश्मन की गोलाबारी की परवाह न करते हुए उस पर फायरिंग करते रहे। उनकी इस वीरतापूर्ण कार्यवाही से उनका सेक्शन आगे बढ पाया। दुश्मन से वीरता से लड़ते हुए सोनांव के इस लाल ने मातृभूमि का कर्ज चुकाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर अपने गांव को इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। उनकी वीरता और कर्तव्य परायणता के लिए उन्हें 25 फरवरी 1948 को मरणोपरान्त वीर चक्र प्रदान किया गया।
आपको बताते चलें कि वीर चक्र युद्धकाल का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। यह सम्मान युद्ध क्षेत्र में असाधारण वीरता के लिए दिया जाता है। सिपाही धनुष धारी सिंह अम्बेडकर नगर के एकलौते वीर चक्र विजेता हैं। इनके बाद अब तक अम्बेडकर नगर में किसी को यह सम्मान नहीं मिला है।
सिपाही धनुष धारी सिंह के नाम पर 26 जुलाई 2024 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अकबरपुर से दोस्तपुर जाने वाले सड़क पर स्थित गोहन्ना चौराहे का नामकरण “सिपाही धनुषधारी सिंह, वीर चक्र (मरणोपरांत) कर दिया गया और फैजाबाद से अकबरपुर जाने वाले राजमार्ग पर स्थित यादव नगर से सोनांवा लिंक रोड पर उनके नाम पर एक शौर्य द्वारा बनाया गया है।
गौहन्ना चौराहे का नामकरण होने के बाद ही कुछ महीनों में चौराहे पर लगा बोर्ड गिर गया और लगभग एक वर्ष से ऊपर का समय बीत चुका है लेकिन अंबेडकरनगर के जिला प्रशासन ने वीर चक्र विजेता के नाम पर लगे उस बोर्ड की सुधि नहीं ली है। ऐसा लगता है कि हमारे देश का प्रशासन सिर्फ फोटो खिंचाने में ही यकीन रखता है, धरातल पर वास्तविक सम्मान करने में नहीं। सिपाही धनुषधारी सिंह के नाती बृजेश सिंह का कहना है कि हमारे नानाजी जिस सम्मान के हकदार थे उनको आज तक वह सम्मान नहीं मिला। उनका कहना है कि उनके गांव में स्थित विद्यालय का नामकरण सिपाही धनुषधारी सिंह वीर चक्र के नाम पर किया जाए ताकि हमारे गांव और आसपास की युवा पीढ़ी अपने माटी के लाल को जान सकें और सेना में जाने के लिए उत्प्रेरित हों।
सिपाही धनुषधारी सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1927 को जनपद फैजाबाद (अयोध्या) के गांव सोनावां में श्रीमती सुखना देवी तथा श्री धनराज सिंह के यहां हुआ था। वह 29 अक्टूबर 1946 को भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए । प्रशिक्षण के पश्चात वह 1 पंजाब रेजिमेंट में पदस्थ हुए। 1945-48 के भारत पाक युध्द के समय वह 3 पैरा रेजिमेंट के साथ संबद्ध थे। पहले इनका गांव जनपद फैजाबाद की तहसील अकबरपुर का हिस्सा हुआ करता था । 29 सितम्बर 1995 को अम्बेडकर नगर के अस्तित्व में आने के बाद इनका गांव जनपद अम्बेडकर नगर में आ गया।
– हरी राम मंदिर
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
बनघुसरा, अयोध्या

JCM 2026-27 के लिए रंजीत शर्मा व भूपेंद्र यादव नामित, कर्मचारी हितों को मिलेगी नई मजबूती फील्ड गन श्रमिक संघ (BPMS/BMS) का सर्वसम्मत निर्णय, पदाधिकारियों ने जताई खुशी
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति -ः ललित गर्ग:-
टूटी पड़ी पैराफिट बॉल की मरम्मत करते कर्मचारी, खबरों के बाद लिया जिम्मेदारों ने संज्ञान, बनवाई गई टूटी पैराफिट बॉल
गरीब जन कल्याण फाउंडेशन के द्वारा महिला सशक्तिकरण पर जोर और वरिष्ठजनाे को किया सम्मानित
भारतीय सेना अग्निवीर भर्ती रैली एएमसी सेंटर और कॉलेज लखनऊ कैंट के एएमसी स्टेडियम में 6 फरवरी 2026 से होगी
द ग्रेस एंड ग्लोरी चर्च ट्रस्ट द्वारा क्रिसमस पर्व पर नूर आया है का आयोजन