राज्यपाल की अध्यक्षता में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर का 28वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ
उपदेश टाइम्स कानपुर/लखनऊ
दीक्षांत समारोह में 649 उपाधियां एवं 63 पदक प्रदान किए गए, 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गईं तथा 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण
विश्वविद्यालय की सभी कमियां एक माह में दूर करने के निर्देश, स्वयं करेंगी निरीक्षण
महिला छात्रावासों की अव्यवस्थाएं तत्काल सुधारने और जर्जर भवनों की मरम्मत के निर्देश
विद्यार्थियों को डिजिलॉकर से अंकतालिका एवं उपाधि डाउनलोड करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित करने के निर्देश
नई लाइब्रेरी एवं निर्माणाधीन छात्रावासों को आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप विकसित करने के निर्देश
सभी छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छता और वॉशिंग मशीन सहित आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश
कृषि विश्वविद्यालयों के गुणवत्तापूर्ण बीजों की खरीद सुनिश्चित करने और किसानों तक पहुंचाने पर जोर
शोध, विज्ञान और किसानों के अनुभव के समन्वय से कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान
शिक्षकों की समितियां बनाकर विश्वविद्यालय परिसर की नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश
100 प्रतिशत आंगनबाड़ी किट वितरण एवं एचपीवी टीकाकरण अभियान पूरा करने के निर्देश
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल
लखनऊ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर का 28वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह में विद्यार्थियों को 649 उपाधियाँ तथा 63 पदक प्रदान किये गये।
इस अवसर पर जनपद फ़र्रूख़ाबाद की 300 आंगनबाड़ी केन्द्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित की गई तथा पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया।
राज्यपाल जी ने महान क्रांतिकारी एवं अमर स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के नाम पर स्थापित इस गौरवशाली विश्वविद्यालय के 28वें दीक्षांत समारोह पर सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए सभी राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि जिन महापुरुषों के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित हैं, उनके जीवन, विचारों, संघर्ष एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से विद्यार्थियों को अवगत कराया जाए। इसके लिए विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से निबंध, भाषण, प्रश्नोत्तरी एवं अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए, ताकि विद्यार्थी महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों के पदक वितरण की समीक्षा करते हुए बताया कि मुख्य परिसर के 15, इटावा परिसर के 15, लखीमपुर खीरी परिसर के 3 तथा हरदोई परिसर के किसी भी विद्यार्थी को पदक प्राप्त नहीं हुआ। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा कि पदकों की संख्या इतनी कम क्यों है तथा संबंधित अधिकारियों से इसका कारण बताने का निर्देश दिया।
राज्यपाल जी ने कहा कि पूर्व में विद्यार्थियों को अंकतालिका एवं उपाधि प्राप्त करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को दूर करने तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार समाप्त करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा डिजिलॉकर की व्यवस्था लागू की गई है। विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद भी विद्यार्थी अंकतालिका एवं उपाधि डिजिलॉकर से डाउनलोड न करके विश्वविद्यालय से प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के उपयोग के लिए जागरूक एवं प्रशिक्षित किया जाए, जिससे वे घर बैठे अपनी अंकतालिका एवं उपाधि डाउनलोड कर सकें।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज फर्रुखाबाद जनपद में जिला प्रशासन के सहयोग से 300 आंगनबाड़ी केन्द्रों को किट वितरित की गई हैं तथा पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में अब तक 64,443 आंगनबाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों को शत-प्रतिशत किट उपलब्ध कराई जाए तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान भी पूर्ण किया जाए।
राज्यपाल जी ने समारोह के मुख्य अतिथि बिम्सटेक के महासचिव एवं भारत के वरिष्ठ राजनयिक राजदूत श्री इंद्र मणि पांडे का स्वागत करते हुए कहा कि वे बिम्सटेक के प्रथम भारतीय महासचिव हैं। उन्होंने बिम्सटेक विज़न 2030 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सदस्य देशों के बीच व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी एवं क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान किया है। राज्यपाल जी ने कहा कि उनके व्यापक अनुभव एवं दूरदर्शी नेतृत्व से विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है और गाँवों की आत्मा उसके किसान हैं। यदि किसान समृद्ध होगा तो भारत समृद्ध होगा और यदि खेत हरे-भरे होंगे तो देश का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। उत्तर प्रदेश भारत की कृषि व्यवस्था का प्रमुख आधार है। देश की लगभग 17 प्रतिशत आबादी उत्तर प्रदेश में निवास करती है तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में प्रदेश की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। गेहूँ एवं गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है, वहीं दूध, दलहन, सब्जियों एवं बागवानी फसलों के उत्पादन में भी प्रदेश का विशिष्ट स्थान है। उन्होंने मिलेट उत्पादन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रदेश के लगभग ढाई करोड़ किसान न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज का किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को नई दिशा दे रहा है। किसान ड्रोन से फसलों की निगरानी कर रहा है, मोबाइल के माध्यम से खेतों का प्रबंधन कर रहा है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रिमोट सेंसिंग, प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण तथा डेटा आधारित कृषि प्रबंधन भविष्य की आवश्यकता हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा इन आधुनिक तकनीकों को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुँचाकर कृषि क्षेत्र में नवाचार और परिवर्तन के वाहक बनेंगे।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज भारत स्टार्टअप, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है। कृषि क्षेत्र में एग्री-स्टार्टअप, ड्रोन सेवाएँ, स्मार्ट सिंचाई, कृषि ई-कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग तथा वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार संभावनाएँ हैं। कृषि अब केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, डिजिटल तकनीक और नवाचार का क्षेत्र बन चुकी है। डिजिटल कृषि मिशन, स्मार्ट सेंसर, ड्रोन आधारित फसल आकलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि परामर्श तथा ई-मार्केट प्लेटफॉर्म किसानों को नई शक्ति प्रदान कर रहे हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि देश में स्मार्ट कृषि पद्धतियाँ तेजी से अपनाई जा रही हैं। ड्रोन आधारित सटीक खेती किसानों को फसल की निगरानी, कीटनाशकों के छिड़काव तथा रोगों की समय पर पहचान में सहायता प्रदान कर रही है। जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं तथा कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से किसान महँगी कृषि मशीनों को किराये पर लेकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती, कृषि वानिकी तथा मृदा में जैविक कार्बन की वृद्धि से किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट जैसे नए आर्थिक अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं। भविष्य का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत भी होगा।
राज्यपाल जी ने बताया कि हाल ही में नाबार्ड द्वारा एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) स्तर की कृषि चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के शिक्षाविदों तथा विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में लघु एवं सीमांत किसानों की समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान, संतुलित उर्वरकों, कीटनाशकों एवं खरपतवारनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग, जल उपयोग दक्षता, मृदा स्वास्थ्य, उत्पादकता, जलवायु परिवर्तन, बागवानी एवं पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
राज्यपाल जी ने कहा कि बैठक में एफपीओ के समक्ष आने वाली चुनौतियों, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, उन्नत कृषि तकनीकों के उपयोग, मूल्य संवर्धन, विपणन व्यवस्था, जल संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर सार्थक चर्चा हुई। विभिन्न जनपदों से आए एफपीओ प्रतिनिधियों एवं किसानों ने अपनी समस्याएँ रखीं, जिन पर विशेषज्ञों ने समाधान सुझाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद मंच कृषि एवं किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश में दलहन बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों को सीड हब परियोजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं। विश्वविद्यालयों को प्रतिवर्ष लगभग 1000 क्विंटल गुणवत्तायुक्त दलहन बीज उत्पादन का लक्ष्य दिया जाता है। विश्वविद्यालय वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप गुणवत्तायुक्त बीज तैयार करते हैं, जिसकी गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होती है। इसके बाद राज्य सरकार इन बीजों को खरीदकर विभिन्न कृषि योजनाओं के माध्यम से किसानों तक पहुँचाती है।
राज्यपाल जी ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में एक कृषि विश्वविद्यालय को 2600 क्विंटल दलहन बीज उत्पादन का लक्ष्य दिया गया। विश्वविद्यालय ने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बीज उत्पादन किया, लेकिन उत्पादन के बाद राज्य सरकार ने उस बीज की खरीद नहीं की। इसके कारण विश्वविद्यालय को लगभग ढाई करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति कृषि विश्वविद्यालयों के लिए चिंता का विषय है।
राज्यपाल जी ने कहा कि क्लस्टर बेस्ड फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (सीबीएफडी) योजना में भारत सरकार एवं राज्य सरकार के मध्य 60ः40 का वित्तीय अनुपात निर्धारित है। योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले 40 प्रतिशत बीजों की गुणवत्ता कई बार अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं होती, जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों की उत्पादकता एवं आय पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों एवं वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा उत्पादित प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उनकी खरीद की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि वैज्ञानिकों का ज्ञान, विश्वविद्यालयों का शोध तथा किसानों का अनुभव एक-दूसरे से जुड़ें। जब अनुसंधान और व्यवहार का प्रभावी समन्वय होगा, तभी कृषि अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बन सकेगी।
राज्यपाल जी ने बताया कि हाल ही में भारत सरकार के केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा प्रगति योजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना का उद्देश्य 20,000 ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी के रूप में तैयार करना तथा आधुनिक तकनीक, वित्तीय सेवाओं और बाजार से जोड़कर लगभग 20 लाख लघु एवं सीमांत किसानों को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित कृषि उद्यमी अपने गांवों में मृदा परीक्षण, आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता, वित्तीय परामर्श, फसल प्रबंधन तथा किसानों को बाजार से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी शिक्षा, तकनीकी दक्षता और नवाचारी सोच को गांवों तक पहुंचाएं। इससे किसान सशक्त होंगे, गांव समृद्ध होंगे और विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा अपने ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता के बल पर कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय और सार्थक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यही शिक्षा की वास्तविक सार्थकता है और यही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी।
राज्यपाल जी ने बताया कि जनभवन की टीम द्वारा विश्वविद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया गया, जिसमें विभिन्न स्थानों पर पाई गई कमियों पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कुलपति एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कमियों को एक माह के भीतर दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं इसकी प्रगति की समीक्षा एवं निरीक्षण करेंगी।
राज्यपाल जी ने महिला छात्रावासों में पाई गई अव्यवस्थाओं पर विशेष नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें तत्काल दूर करने तथा जर्जर भवनों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रस्तावित नई लाइब्रेरी का निर्माण वर्तमान समय की आवश्यकताओं एवं विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाए।
राज्यपाल जी ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में 22 छात्रावास संचालित हैं। उन्होंने सभी छात्रावासों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा निर्माणाधीन दो नए छात्रावासों का डिज़ाइन आधुनिक, सुरक्षित एवं सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावासों की मेस में स्वच्छता, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने, विद्यार्थियों की सुविधा के लिए वॉशिंग मशीन स्थापित करने तथा समुचित रखरखाव सुनिश्चित करने को कहा।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय की गौशाला में पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने, खेल मैदानों की स्थिति में सुधार करने तथा एक्सपायर हो चुके फायर सेफ्टी उपकरणों को तत्काल बदलकर नए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने परिसर की स्वच्छता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल देते हुए निर्देश दिए कि समितियों का गठन कर वीसी, शिक्षक एवं कर्मचारी नियमित रूप से परिसर की स्वच्छता की निगरानी करें और विश्वविद्यालय को स्वच्छ, सुरक्षित एवं आदर्श परिसर के रूप में विकसित करें।
राज्यपाल जी ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं सहित कुल 13 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, पुस्तक, पेन एवं बैग प्रदान कर सम्मानित किया तथा सभी को चॉकलेट भी वितरित की। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाली एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्मृति चिह्न (मोमेंटो) एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पुस्तक भेंट की तथा पाँच पुस्तकें जिला प्रशासन को भी प्रदान कीं।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजीव गुप्ता ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, जिला प्रशासन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के समस्त संकायों के अधिष्ठातागण, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक, स्कूली बच्चे तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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