भाषाओं की महारथी काशिका कपूर काशिका कपूर की भाषाएँ बनीं उनकी सबसे बड़ी ताक़त
मुंबई (अनिल बेदाग): फिल्म इंडस्ट्री में जहाँ भाषा अक्सर कलाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है, वहीं अभिनेत्री काशिका कपूर ने इसे अपनी सबसे बड़ी ताक़त में बदल दिया है। काशिका सिर्फ किरदार निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह हर भाषा के साथ उसकी संस्कृति, भावनाओं और संवेदनाओं को भी आत्मसात करती हैं। तमिल, तेलुगु और हिंदी के साथ-साथ स्पैनिश जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषा पर उनकी पकड़ उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाती है।
इंडस्ट्री में काशिका के साथ काम कर चुके निर्देशकों और निर्माताओं का मानना है कि उनकी बहुभाषी दक्षता शूटिंग के दौरान एक बड़ा प्लस साबित होती है। सेट पर संवादों को बार-बार समझाने या भावनात्मक टोन समझने में समय नहीं लगता, जिससे सीन ज्यादा स्वाभाविक और प्रभावी बन पाते हैं। यही वजह है कि उनकी परफॉर्मेंस में एक अलग स्तर की सच्चाई और गहराई नज़र आती है।
काशिका खुद मानती हैं कि भाषा सिर्फ संवाद अदायगी का ज़रिया नहीं, बल्कि किरदार से जुड़ने का पुल है। उनका कहना है कि अलग-अलग भाषाएँ सीखने से उन्हें लोगों की सोच, भावनाओं और संस्कृतियों को करीब से समझने का मौका मिला, जो उनके अभिनय को और समृद्ध बनाता है। सूत्रों के अनुसार, उनकी यह खासियत डबिंग पर निर्भरता कम करती है और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाती है। यही प्रोफेशनल अप्रोच उन्हें निर्देशकों की पसंदीदा बना रही है।
वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा के विस्तार के साथ, काशिका कपूर अपनी बहुभाषी पहचान के दम पर नए दौर की अभिनेत्री के रूप में उभर रही हैं—जो न सिर्फ टैलेंटेड हैं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से जागरूक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक भी।

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