विश्व स्ट्रोक दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया
कानपुर नगर उपदेश टाइम्स
विशेषज्ञों ने बताया, हर वर्ष 12 लाख लोग होते हैं स्ट्रोक के शिकार
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा द्वारा आज “वर्ल्ड स्ट्रोक डे” के अवसर पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस मौके पर उपस्थित विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक) जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया।
पत्रकार वार्ता में आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव डॉ. शालिनी मोहन, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट एवं जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज से डॉ. कुणाल सहाय, डॉ. निखिल साहू (इंचार्ज स्ट्रोक यूनिट जीएसवीएम), तथा डॉ. दीपक श्रीवास्तव वैज्ञानिक संयोजक के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कहा कि हमारे देश में हर वर्ष लगभग 12 लाख लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं, जिनमें से लगभग 25 प्रतिशत मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते, जबकि इतने ही प्रतिशत की मृत्यु हो जाती है। बाकी बचे मरीजों में 25 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाते हैं और केवल 25 प्रतिशत ही पूरी तरह स्वस्थ हो पाते हैं।
डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि स्ट्रोक के बाद दृष्टि संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति में चार प्रकार की दृष्टि विकृतियां देखी जाती हैं, जिनमें दृष्टि क्षेत्र की हानि, धुंधलापन या नेत्र गति की समस्या शामिल हैं।
डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि 25 वर्ष से अधिक उम्र के हर चार में से एक व्यक्ति को जीवनकाल में स्ट्रोक होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर हृदय रोग के बाद स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है, लेकिन भारत में स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने में अभी भी जागरूकता की कमी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को या उसके परिजनों को समय रहते यह पहचान हो जाए कि उसे स्ट्रोक हुआ है, तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू किया जा सकता है। स्ट्रोक के मरीजों में TPA नामक दवा शुरुआती समय में दी जाने पर जान बचाई जा सकती है।
अंत में, सभी चिकित्सकों ने इस बीमारी को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने की अपील की और कहा कि हृदय रोग की तरह ही ब्रेन स्ट्रोक को भी “महा बीमारी” के रूप में गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

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