चिकित्सा पद्धति पूर्वक जिंदगी जीने की कला है ऑक्यूपेशनल थेरेपी
निःशुल्क ऑक्यूपेशनल थेरेपी परामर्श सत्र
(विश्व ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस – 27 अक्टूबर)
– डॉ. अनुष्का जैन (ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट), इंदौर
इंदौर। ऑक्यूपेशनल थेरेपी में ‘पार्टिसिपेशन मैटर्स’ यानी हर व्यक्ति की भागीदारी मायने रखती है। इस विशिष्ट चिकित्सा पद्धति का की जानकारी और उसका महत्व हर व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक है। भले ही कोई व्यक्ति इस चिकित्सा पद्धति के नाम से परिचित हो या न हो, लेकिन अपने दैनिक जीवन में स्वस्थता, कार्यक्षमता और बेहतर जीवनशैली का महत्व हर किसी के लिए है। ऑक्यूपेशनल थेरेपी केवल बीमारी या दिव्यांगता से जूझ रहे लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें रोजमर्रा की गतिविधियों को करने में कठिनाई होती है। इसलिए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर सही मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहद जरूरी है। यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है-ऑक्यूपेशनल थेरेपी का लक्ष्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उसकी जिंदगी में वापस भागीदार बनाना है।
क्या है ऑक्यूपेशनल थेरेपी?
ऑक्यूपेशनल थेरेपी यह एक स्वास्थ्य सेवा है, जो व्यक्ति को रोजमर्रा के काम करने और जीवन में अधिक स्वतंत्र बनने में मदद करती है। बीमारी, दुर्घटना, स्ट्रोक, मस्तिष्क की सर्जरी या विकास संबंधी समस्याओं के कारण जब व्यक्ति को खाना खाने, कपड़े पहनने, लिखने, पढ़ने, खेलने या काम करने में परेशानी होती है, तब ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट उसकी जरूरतों के अनुसार उपचार और प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह थेरेपी बच्चों के विकास, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और बुजुर्गों की आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
छोटी उपलब्धियां ही नहीं, बड़ा बदलाव भी होता है
किसी बच्चे का पहली बार खुद कपड़े पहनना, स्ट्रोक के बाद मरीज का अपने हाथ से खाना खाना या किसी दिव्यांग व्यक्ति का स्कूल और कार्यस्थल पर सक्रिय भागीदारी करना-ये केवल छोटी उपलब्धियां नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान की ओर बढ़ते कदम हैं। इसके लिए परिवार और समाज का सहयोग भी जरूरी है। सही मार्गदर्शन, अनुकूल वातावरण और दैनिक गतिविधियों का अभ्यास व्यक्ति की स्वतंत्रता और भागीदारी को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।
निःशुल्क ऑक्यूपेशनल थेरेपी परामर्श सत्र
विश्व ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस के उपलक्ष्य में इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित ‘प्रयास स्पीच एण्ड हियरिंग सेंटर’ में इच्छुक व्यक्तियों और परिवारों के लिए निःशुल्क ऑक्यूपेशनल थेरेपी परामर्श एवं आकलन सत्र रखे गए हैं। ये सत्र अगले एक सप्ताह तक चलेंगे। इसमें मुख्य रूप से ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. अनुष्का जैन (ओटी.) द्वारा व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में आने वाली कठिनाइयों का आकलन कर उसकी जरूरतों के अनुसार विस्तृत मार्गदर्शन तथा घर पर अभ्यास के लिए व्यक्तिगत योजना दी जाएगी, ताकि परिवार भी पुनर्वास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सके। संस्थान के निर्देशक मण्डल सम्मान्या दिशा जैन, गरिमा दीक्षित और हरीश शिन्दे की अहम भूमिका होगी।
एक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के लिए सफलता का अर्थ केवल मांसपेशियों की ताकत बढ़ना नहीं है। सफलता तब भी है, जब कोई व्यक्ति दोबारा अपने हाथ से खाना खाने लगे, कोई बच्चा स्वयं कपड़े पहनना सीख जाए, स्ट्रोक से उबर रहा व्यक्ति दैनिक कार्यों में अधिक स्वतंत्र हो जाए या कोई बुजुर्ग सुरक्षित तरीके से अपनी दिनचर्या पूरी कर सके।
प्रेषक- डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’
22/2, रामगंज, जिन्सी, इन्दौर
मो 9826091247

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