जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में गिरते भूजल स्तर और जल गुणवत्ता के संबंध में बैठक संपन्न हुई
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में
गिरते भूजल स्तर और जल गुणवत्ता के संबंध में बैठक संपन्न हुई। बैठक में
राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण एवं भूजल प्रबंधन योजना 2.0 (NAQUIM 2.0) के तहत भूजल संरक्षण की दिशा में तैयार रणनीति पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई।
केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ द्वारा की गई कार्ययोजना के तहत वैज्ञानिक जगदम्बा प्रसाद और विपिन मिश्रा ने कानपुर शहरी क्षेत्र में किए गए भूजल सर्वेक्षण के निष्कर्ष और सुझाव प्रस्तुत किए।
अध्ययन में यह सामने आया कि शहर के अधिकांश हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि शहरी इलाकों में वर्षाजल पुनर्भरण की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है और तत्काल दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।
विज्ञानियों के अनुसार, सौ फीट से अधिक गहराई पर स्थित बंद जलभृतों का जल पीने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित है, जबकि सतही या उथले जल स्रोतों में प्रदूषण की आशंका अधिक है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि द्वितीय और तृतीय जलभृतों का उपयोग पेयजल के वैकल्पिक स्रोत के रूप में किया जाए, जिससे प्रथम जलभृत पर निर्भरता घटे। इसके अतिरिक्त जिन क्षेत्रों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया है, वहाँ एक सौ बीस मीटर से अधिक गहराई पर स्थित दानेदार भूगर्भीय संरचना वाले क्षेत्रों में ट्यूबवेल निर्माण को उपयुक्त माना गया है। वहीं, जिन इलाकों में सतही जल की उपलब्धता नहीं है, वहाँ उथले ट्यूबवेलों की श्रृंखला से राहत मिल सकती है।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर निगम, जल संस्थान और जल निगम दो सप्ताह के भीतर भूजल प्रबंधन की व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करें। साथ ही, रेन वाटर हार्वेस्टिंग की वर्तमान स्थिति का एक सप्ताह में सर्वेक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिन शासकीय भवनों में वर्षाजल संचयन की व्यवस्था नहीं है, वहाँ इसे प्राथमिकता पर स्थापित किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जल भविष्य की सुरक्षा है, और आज लिए गए निर्णय आने वाले समय में कानपुर की जल संरचना को स्थायित्व देने में सहायक होंगे। उन्होंने सभी विभागों से आह्वान किया कि जल संरक्षण और पुनर्भरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, जल संस्थान, जल निगम, नगर निगम, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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