दुनिया के दो हिस्से होते हैं, एक सच की दुनिया और एक ख़यालों की दुनिया। अधिकतर लोगों के लिए सच की दुनिया काफ़ी होती है। वे उसमें जीते मरते, इश्क़ करते, परेशान होते है फिर भी जीते रहते हैं। वे कभी कभी ख़यालों की दुनिया में थोड़ी डुबकी लगाते हैं…वे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त रहते हैं ख़ुश या दुखी, जो भी हों, इसी दुनिया के अंदर रहते हैं। एक दुनिया होती है ख़यालों की। बड़ी सम्मोहक, बड़ी तिलिस्मी, बहुत ख़ूबसूरत। ये दुनिया सबको अच्छी नहीं लगती क्योकि ये दुनिया ख़ुद ही बनानी पड़ती है, ये दुनिया वैसी ही होगी जैसी आप इसे बना पाएँगे। इस दुनिया के शहर, इस दुनिया की सड़कें, इस दुनिया के रंग सब ख़ुद से रचने होते हैं। एक बुनियादी ढाँचा बनाना होता है,जैसा आजकल हमने, आपने अपने आस पास फुर्सत के क्षणों में बना रखा है।पर ये भी एक सच्चाई है कि सच्चाई की दुनिया हमेशा से ही प्रभावी और जीवन के करीब होती है। सनातनी भगवान राम, भगवान कृष्ण ,नरसिंह भगवान, वराह देव आदि को भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। हम न सिर्फ उन्हें अवतार मानते हैं बल्कि रोज उनकी पूजा भी करते हैं। इन हमारे इन सभी अवतारों का वर्णन हमारे अलग-अलग धर्मग्रंथों में विस्तार से किया गया है।।।।। लेकिन, अलग-अलग होने के बावजूद सभी में एक बात सामान्य रूप से वर्णित है कि…. “जब राक्षसों के अत्याचार हद से ज्यादा बढ़ गए और लगने लगा कि अब सृष्टि का विनाश हो जाएगा, तब प्रभु ने अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा की”। इसका मतलब ये निकलता है कि संभावित रास्ता बंद हो जाने के बाद ही प्रभु ने अवतार लिया। उदाहरण के तौर पर रामायण को ही लीजिए।...
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