गौ-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाकर कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाएं किसान : सूर्य प्रताप शाही
कानपुर में संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया शुभारंभ
गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रयोग और फसल विविधीकरण पर जोर
कृषि मेले में लगाए गए 150 स्टॉल, उत्कृष्ट कार्य करने वाली 18 महिला कृषक सम्मानित
उपदेश टाइम्स कानपुर
कानपुर, चित्रकूटधाम एवं झांसी मंडलों की संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 एवं जनपद स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन गुरुवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर परिसर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गोष्ठी में किसानों को रबी फसलों की बेहतर पैदावार, कृषि की नवीन तकनीकों, प्राकृतिक खेती तथा कृषि आधारित आय बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी गई।
गोष्ठी में प्रमुख सचिव, कृषि, उत्तर प्रदेश शासन एम.के. शन्मुगा सुंदरम की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार एवं कानपुर नगर की महापौर प्रमिला पांडेय विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्रा, कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, कानपुर मंडल के आयुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन, झांसी मंडल के मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे, संयुक्त कृषि निदेशक धर्मेंद्र कुमार तथा उप कृषि निदेशक, कानपुर नगर डॉ. आर.एस. वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कृषि मेले में 150 स्टॉलों के माध्यम से किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
गोष्ठी के अवसर पर आयोजित कृषि मेले में कृषि विभाग, बीज, कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण, भूमि संरक्षण, रेशम, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, लघु सिंचाई, चकबंदी, पशुपालन तथा अन्य सरकारी एवं निजी संस्थानों की ओर से लगभग 150 स्टॉल लगाए गए। इनके माध्यम से किसानों को उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों, फसल सुरक्षा उपायों, मृदा स्वास्थ्य, नवीन कृषि तकनीकों एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने संबोधन में किसानों से गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक एवं असंतुलित प्रयोग कम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों से विभागीय योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से इस वर्ष दलहनी एवं तिलहनी फसलों के 10 लाख से अधिक बीज मिनीकिट किसानों को निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि यंत्रों, बीज, डीएपी एवं अन्य कृषि निवेशों से संबंधित योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन पर जोर देते हुए बताया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादित बीजों की खरीद बीज विकास निगम द्वारा नियमानुसार की जाती है।
प्रमुख सचिव, कृषि एम.के. शन्मुगा सुंदरम ने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर संस्तुत उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, उत्पादन लागत कम करने तथा कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण के साथ पशुपालन एवं मत्स्यपालन जैसी सहायक गतिविधियों को अपनाने पर भी जोर दिया।
कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और किसान देश का अन्नदाता है। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किसानों के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जैविक खेती अपनाने वाले किसानों की सराहना करते हुए अन्य किसानों से भी पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की।
*कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान, 18 महिला कृषक सम्मानित*
कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी ने किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। विभिन्न प्रकार के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान तथा बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रत्येक खेत तक सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने, उनका उपयोग पशुचारे एवं अन्य उपयोगी कार्यों में करने, पशुओं को खुले में आवारा न छोड़ने तथा खेतों में मेड़बंदी कर मिट्टी की नमी एवं उर्वरता संरक्षित करने की अपील की।
गोष्ठी में कानपुर, चित्रकूटधाम एवं झांसी मंडलों के 13 जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों को प्रस्तुत किया। प्रत्येक जनपद से चयनित दो-दो किसानों ने भी अपनी समस्याएं एवं अपेक्षाएं रखीं। संबंधित अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं सुझाव दिए।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी किसानों को विभिन्न कृषि विषयों पर तकनीकी जानकारी प्रदान की। निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी, तिलहन विशेषज्ञ डॉ. महक सिंह, दलहन विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश मिश्रा, मृदा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. कौशल कुमार, डॉ. साधना वैश्य तथा पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. रामजी गुप्ता ने किसानों को अपने-अपने विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने तथा कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए उनसे संपर्क बनाए रखने को प्रेरित किया।
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 18 महिला कृषकों को सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका एवं उनके योगदान को प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त उप परियोजना निदेशक (आत्मा), कानपुर नगर शिव आसरे पांडेय ने किया। अंत में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने अतिथियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

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