राइफलमैन केदार सिंह शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
आतंकवाद वह मानसिकता है जो दूसरों के अधिकारों पर बलात कब्ज़ा करना चाहती है और अपनी विचारधारा को जबरदस्ती दूसरे पर थोपना चाहती है | जो लोग उस विचारधारा से सहमत नहीं होते उनको उस विचारधारा के लोग किसी भी तरह से लोभ , लालच देकर, डरा धमका कर मनाने का प्रयास करते है | इस तरह का प्रयास करने वाले और इस तरह के प्रयास को रोकने वालों में हमेशा से संघर्ष होता आया है और यह संघर्ष किसी भी सीमा तक जा सकता है | एक ऐसा ही एक संघर्ष 10 मई 2006 को जम्मू – कश्मीर के राजौरी जिले में हुआ जिसने एक परिवार की खुशियों को ग्रहण लगा दिया |
43 राष्ट्रीय राइफल्स जम्मू – कश्मीर के राजौरी जिले में तैनात थी। राइफलमैन केदार सिंह एक आतंकरोधी अभियान के दौरान अपनी यूनिट की टीम के प्रमुख स्काउट थे। यह क्षेत्र पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ और तीखी खड़ी चट्टान वाला ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र था। उन्होंने एक पेड़ के पीछे आतंकवादियों के एक समूह को देखा | आतंकवादियों ने सैनिकों को देखते ही गोलीबारी करते हुए भागना शुरू कर दिया | आतंकवादियों की ओर से की जा रही भीषण गोलीबारी के बावजूद राइफलमैन केदार सिंह बिजली की गति से भागकर उनके भागने के मार्ग में पहुंचे और उसे अवरुद्ध कर दिया। दोनों और से गोलीबारी शुरू हो गयी हुई | सैनिकों द्वारा की जा रही सटीक और भीषण गोलीबारी के कारण आतंकवादी घायल हो गए। घायल आतंकवादियों में से एक ने राइफलमैन केदार सिंह के ऊपर छलांग लगा दी और ग्रेनेड से हमला करके उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद राइफलमैन केदार सिंह ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए आतंकवादियों पर प्रभावी गोलीबारी की | गहरे घावों और तेजी से बहते खून के कारण वीरगति से पूर्व उन्होंने बिल्कुल नजदीक से एक आतंकवादी को मार गिराया। बाद में खोजबीन करने पर एक और आतंकवादी का शव मिला जो राइफलमैन केदार सिंह द्वारा की गई गोलीबारी के कारण मारा गया था।
राइफलमैन केदार सिंह ने आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए अनुकरणीय साहस और वीरता का परिचय दिया और मां भारती की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। राइफलमैन केदार सिंह के साहस और वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत किया गया |
राइफलमैन केदार सिंह का जन्म 12 जुलाई 1982 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की सादाबाद तहसील के गांव कंजोली में श्रीमती किरण देवी और श्री हरी सिंह के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गांव के स्कूल से पूरी की और भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 15 राजपूताना राइफल्स में तैनात हुए। वर्ष 2006 में वह प्रतिनियुक्ति पर जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 43 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ सम्बद्ध थे। उनके परिवार में उनके माता पिता , दो भाइयों का परिवार , उनकी वीरांगना श्रीमती रेनू देवी और उनका बेटा है |
राइफलमैन केदार सिंह की वीरता और बलिदान को सदैव स्मरणीय बनाने के लिए उनके परिजनों ने अपने गांव में एक प्रतिमा का निर्माण करवाया है | इनके परिजनों का कहना है कि राइफलमैन केदार सिंह ने देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया लेकिन उनके नाम को लोगों के जेहन में अविस्मरणीय बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किया | उनका कहना है कि राइफलमैन केदार सिंह को सम्मान देने के लिए हमारे गांव में एक शौर्य द्वार निर्माण और एक सड़क का नामकरण करना चाहिए |
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
लखनऊ
7087815074

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