हादसे से हौसले तक का सफर-मानवता और सेवा के पर्याय बने पंकज सिंह निषाद
उपदेश टाइम्स कानपुर
कानपुर/जालौन जीवन में मुश्किलें अक्सर इंसान को तोड़ देती हैं, लेकिन कुछ विरले ऐसे भी होते हैं जो मुश्किलों को ही अपनी शक्ति बना लेते हैं। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी पंकज सिंह निषाद एक ऐसा ही नाम हैं, जिन्होंने शारीरिक अक्षमता को अपने संकल्प के आड़े नहीं आने दिया। अपने जन्मदिवस के अवसर पर उन्होंने अपनी जीवन-यात्रा के उन पन्नों को साझा किया, जो किसी भी हारते हुए मन में उत्साह भर सकते हैं। नियति का प्रहार और संकल्प की जीत-एक समय सामान्य जीवन जी रहे पंकज सिंह की जिंदगी में राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ एक भीषण हादसा काल बनकर आया। इस दुर्घटना ने उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) बना दिया। लेकिन जहाँ शरीर की सीमाएं समाप्त हुईं, वहीं से उनके हौसलों की एक नई उड़ान शुरू हुई। उन्होंने इस हादसे को अंत नहीं, बल्कि ‘सेवा मार्ग’ का एक नया अध्याय माना। विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं थमे कदम। पंकज सिंह ने उन कठिन दौरों को याद किया जब शरीर साथ नहीं दे रहा था। नोटबंदी और कोरोना काल की विभीषिका के दौरान, जब वे स्वयं दो-दो कैथेटर और वॉकर के सहारे थे, तब भी उनका ध्यान अपनी पीड़ा पर नहीं बल्कि दूसरों की सेवा पर था। उन्होंने असहायों, पीड़ितों और वृद्धजनों के आंसू पोंछने को ही अपना प्राथमिक धर्म समझा। “जो दर्द मैंने खुद झेला, वही आज दूसरों के दु:ख को समझने की मेरी सबसे बड़ी ताकत है। सेवा ने मुझे मानसिक शांति दी और दवाइयों पर मेरी निर्भरता कम ही नहीं पूर्णतः बंद भी हो गईं।” पंकज सिंह निषाद संस्कारों की विरासत पंकज सिंह अपनी इस वैचारिक दृढ़ता का श्रेय अपने पूज्य पिता स्व. चंदन सिंह निषाद जी को देते हैं। उनके द्वारा दिए गए ‘मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है’ के संस्कार ही आज उनकी पहचान बन चुके हैं। वे बचपन के अभावों और चुनौतियों को अपना शिक्षक मानते हैं। सेवा का विस्तृत फलक आज वे केवल पत्रकारिता के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एक जमीनी समाजसेवी के रूप में भी सक्रिय हैं। बेजुबान पशु-पक्षियों की रक्षा से लेकर, विकलांगों और असहायों की आवाज बनने तक, उनका हर प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समर्पित है। खुशियों का दोहरा अवसर इस खास दिन पर खुशियां तब दोगुनी हो गईं, जब उन्होंने अपनी भांजी शियाँशी का भी जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर सभी भाईयों – बहनों, देवी और सज्जनों ने भांजी शियाँशी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए परिवार के साथ स्नेहपूर्ण समय बिताया। शियांशी भांजी का आर.टी. ई. के तहत पहली बार स्कूल में हुआ दाखिला, अक्षरों के ज्ञान से होंगी रूबरु। डबल इंजन सरकार की भूरि- भूरि प्रशंसा भी की उनका नारा भी है “बेटी पढ़ाओ बेटी कमाओ बेटी बचाओ।” कार्यक्रम के अंत में एक संदेश समाज के नाम पंकज सिंह निषाद का जीवन हमें सिखाता है कि ‘अक्षमता’ शरीर में नहीं, बल्कि सोच में होती है। यदि इरादे मजबूत हों, तो वॉकर के सहारे चलने वाला व्यक्ति भी समाज को नई राह दिखा सकता है। इस मौके पर नन्हें मुन्ने बच्चों सहित उत्तर प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना हजारिया,लक्ष्मी हजारिया, मनोज सविता,संतोष सागर, मंशा सविता,शना,इजरायल आदि लोग रहे मौजूद।

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