हमारा भक्ति मार्ग प्रेम का ही मार्ग है: देवी -संजीव कुमार आलोक
फिल्म/बातचीत
भोजपुरी की चर्चित लोकगायिका देवी का पिछले दिनों पटना में एक कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा गाए गए भजन में “अल्लाह” शब्द को लेकर काफ़ी विवाद उत्पन्न हो गया जिसे लेकर भोजपुरी गायिका देवी इन दिनों सुर्खियों में हैं। संजीव कुमार आलोक ने गायिका देवी से उक्त कार्यक्रम में हुए हंगामा को लेकर कई पहलुओं को जोड़कर बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंश-
25 दिसम्बर को बाबू सभागार में आपके साथ जो कुछ हुआ उस पर आप क्या कहेंगी?
यह असहिष्णुता की पराकाष्ठा थी। अल्लाह शब्द पर उग्र हो जाना तो उग्रवाद है। भारतीय संस्कृति की मूल भावना ऐसी कदापि नहीं है। यह गुमराह लोगों की पहचान है। युवा हिन्दू शक्ति नकारात्मक दिशा में जा रही है। इसे विवेक से रोकना चाहिए।
कुछ लोग कहते है मूल रूप में जो भजन है, उसमें अल्लाह नहीं था, इसे गांधी जी ने जोड़ा है?
जी, इसका मतलब है कि गाँधी ने गलती कर दी पर, मैं ऐसा नही मानती। अल्लाह शब्द के जुड़ जाने से सद् साम्प्रदायिक सद्भावना को भी बल मिलता है। पूरे भारत में गांधी जी के इसी प्रिय भजन को बड़े प्रेम से गाया जाता है। वैसे, जिसको इस
भजन से परेशानी है, वो स्वतंत्र है कि वे मूल भजन ही गायें लेकिन गांधी जी के भजन पर का हंगामा करना गांधी जी का अपमान करना है। यह मोदीजी और बीजेपी की छवि धूमिल करता है। मोदी जी ने भी सबका साथ और सबका विकास का नारा दिया है। साम्प्रदायिक तत्वों को यदि भाजपा नियंत्रित नहीं करेगी तो भाजपा को भी भारी नुक़सान हो सकता है।
इस घटना पर आप क्या संदेश देना चाहेंगी ?
देश में साम्प्रदायिक सद्भाव के बिगड़ जाने से ही ऐसी घटनाएं होती है। हमें विश्व में शांति का वातावरण तैयार करना है। नहीं भूलना चाहिए कि बिहार से ही बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय है। क्षमा, करूणा और अहिंसा को हिन्दू धर्म में सबसे ऊंचा स्थान है। हमारा भक्ति मार्ग प्रेम का ही मार्ग है।
इस घटना पर राजनीति भी होगी। आप क्या कहेंगी?
-राजनीति करने वालों की अपनी स्वतंत्रता है। पर राजनीति से ऊपर मानव धर्म है। मानव धर्म पर संकट नहीं आना चाहिए।
क्या आप भी राजनीति में आने वाली है ?
-बिल्कुल नहीं। किन्तु मैं लोगों की सेवा जरूर करना चाहती हूं। सेवा के लिये राजनीति में जाना कोई जरुरी नहीं।

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