उपदेश टाइम्स न्यूज़

मानव अधिकार दिवस-10 दिसम्बर, 2024 संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा घोषित दिवसों में एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व मानवाधिकार दिवस। प्रत्येक वर्ष 10 दिसम्बर... Read More
69वें फिल्मफेयर अवार्ड्स साउथ 2024 में ‘बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर (तेलुगु)’ जीता, मुंबई (अनिल बेदाग) : श्रीराम चंद्र भारतीय मनोरंजन उद्योग में एक ऐसे व्यक्तित्व... Read More
भगवान शिव, पार्वती को कहते हैं कि गिरिजा मुझे हरि अर्थात भगवान श्रीराम का चरित्र बहुत सुहाता है। हमारे वेदों-शास्त्रों ने हरि के निर्मल चरित्रों,... Read More
होमियोपैथिक डॉक्टर व सामाजिक कार्यकर्ता आजकल आए दिन सुनने एवं होने वाली तमाम बीमारियों में से एक बहुत ही आम बीमारी जो करीब करीब सभी... Read More
हिन्दी गीत खुद भटके संग संग भटकाता चंचल पल को ठहर न पाता लगता है बंजारा मन आहट बिन पदचिह्न के छोड़े गति असीमित चहुँदिश दौड़े घुमे है जग सारा मन … लगता है बंजारा मन न कोई सीमा न कुछ बंधन कभी न रूकता रोके से मन उधर  चले  ये जहां चाह है मतवाले   की  वहीं  राह है गैरों से कब खुद ही खुद से जीत जीतके हारा मन … लगता है बंजारा मन बाट   जोहे  आकंठ  उदासी कितनी भूखी कब से प्यासी आड़ी – तिरछी ठहरी नेह से पलको पलकों में दृग देह से सहज सरल उस परछाई से जब सहमा बेचारा मन … लगता है बंजारा मन अपनी धुन में  हो आनंदित चिंतन चिंतित या मर्यादित विनम्र विचार बड़े या छोटे अंतस्  बोल अधर से लौटे बात नहीं  जब सुनता कोई... Read More
मानवाधिकार दिवस (10 दिसम्बर) मानवाधिकार मनुष्य के मूलभूत सार्वभौमिक अधिकार हैं, जिससे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि किसी भी दूसरे कारक के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता। 10 दिसंबर 1948 को यूनाइटेड नेशन्स की जनरल एसेम्बली ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद ही एसेम्बली ने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे इस घोषणा का प्रचार करें और देशों या प्रदेशों की राजनीतिक स्थिति पर आधारित भेदभाव का विचार किए बिना विशेषतः स्कूलों और अन्य शिक्षा संस्थाओं में इसके प्रचार, प्रदर्शन और व्याख्या का प्रबंध करें। इस घोषणा में न सिर्फ मनुष्य जाति के अधिकारों को बढ़ाया गया बल्कि महिला और पुरुषों को भी समान अधिकार दिए गए। मानवाधिकार विश्व भर में मान्य व्यक्तियों के वे अधिकार हैं जो उनके पूर्ण शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यावश्यक हैं इन अधिकारों का उदभव मानव की अंतर्निहित गरिमा से हुआ। इस उद्घोषणा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति और समाज का प्रत्येक अंग इन अधिकारों और स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान जागृत करेगा और अधिकारों की विश्वव्यापी एवं प्रभावी मान्यता और उनके पालन को सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। मानव अधिकारों की सामान्य की परिभाषा इस रूप में समझी जा सकती है-दृढ़तापूर्वक रखे गये दावे, अथवा वे जो होने चाहिए, अथवा कभी-कभी उनको भी कहा जाता है जिनकी विधिक रूप से मान्यता है और उन्हें संरक्षित किया गया है जिनका प्रयोजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यक्तित्व आध्यात्मिक, नैतिक और अन्य स्वतंत्रता का अधिक से अधिक पूर्ण और स्वंतंत्र विकास सुनिश्चित करने को है। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार मानवाधिकार का इस प्रकार समझा जा सकता है। मानव अधिकार से प्राण, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित ऐसे अधिकार अभिप्रेत हैं जो संविधान द्वारा प्रत्याभूत किये गए हों या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निविष्ट और भारत में न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं। जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार के कुछ तत्त्व मानवाधिकारों में निहित है। आज के समय में, जब हम विकास और प्रगति की बात करते हैं, तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मानवाधिकार और महिला संरक्षण हमारे समाज के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। महिलाएं हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें समान अधिकार और अवसर प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन आज भी महिलाएं कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जैसे कि लिंग भेदभाव, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, और आर्थिक असमानता। यह हमारे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है और हमें इसे हल करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। इसी प्रकार सरकार और सामाजिक संगठनों को महिला संरक्षण के लिए ठोस काम करना होगा। इसके लिए महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना प्रमुख है। हमें महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करना होगा ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। हमें यह भी याद रखना होगा कि मानवाधिकार और महिला संरक्षण केवल महिलाओं के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। जब हम महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करते हैं, तो हम अपने समाज को अधिक समृद्ध और विकसित बनाते हैं। हम सब एकजुट होकर मानवाधिकार और महिला संरक्षण के लिए काम करें और एक समान और न्यायपूर्ण समाज बनाएं। मानवाधिकार और महिला अधिकार संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर हमें चिंतन कर कार्य करने की आवश्यकता है। महिला शक्ति हमारे समाज की विशिष्ट पहचान है, उन्हें समान अधिकार और अवसर प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी बनती है। इनके अधिकारों में शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता, और सुरक्षा शामिल हैं। लेकिन आज भी बहुत सी महिलायें अनेक चुनौतियों का सामना करती हैं, जैसे कि लिंग भेदभाव, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, और आर्थिक असमानता। मानवाधिकार संरक्षण के लिए हमें महिलाओं को शिक्षा और जागरूकता प्रदान करनी होगी ताकि वे अपने अधिकारों के बारे में सचेत हो सकें। इसके साथ महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी संरक्षण प्रदान करना, महिलाओं को सामाजिक समर्थन प्रदान करना ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। हमें महिला अधिकारों और मानव अधिकार संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करना होगा... Read More