ब्रह्म और विज्ञान की आत्मा हैं वेद
सावन साहित्य सेवा सदन, अटल नगर (अमवा बाजार), रामकोला, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में आयोजित साक्षात्कार के दौरान साक्षात्कर्ता सुनील चौरसिया सावन के एक प्रश्न के जवाब में असलम अली उर्फ आचार्य असलम चतुर्वेदी ने वेद के संदर्भ में विस्तार से बताते हुए कहा कि वेद विद् धातु से बना है जिसका अर्थ है- जानना। वेद से हम अनेक ब्रह्म शक्तियों के विषय जानते हैं। ब्रह्म शक्तियों से हम दिव्य शक्ति को प्राप्त करते हैं। वेद असीम शक्तियों का भंडार हैं। उन शक्तियों से संपूर्ण वसुंधरा की रक्षा करते हैं। वेद दैवीय ग्रंथ है। इसका संकलन ‘कृष्ण देव द्वैपायन वेद व्यास’ ने किया। वेद चार खंडों में विभाजित हैं। हर खंड का अलग-अलग महत्व है। वेद का पहला खंड ऋग्वेद है। ऋग्वेद में देवताओं की स्तुति और बीमारियों के निदान हेतु प्राकृतिक चिकित्सा के विषय में उल्लेख किया गया है। इस चिकित्सा के अंतर्गत अनेक वैद्य ऋषि हुए। जिनमें भारतीय चिकित्सा के जनक ऋषि ‘सुश्रुत’ को कहा गया। दूसरा सामवेद आता है। जिसका उपवेद गन्धर्व वेद है जो भारतीय संगीत का जनक कहा गया है। जिसमें गायन,वादन, नृत्य इत्यादि संगीत विषयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है जो प्राचीन वाद्ययंत्रों में वीणा का प्रमुख स्थान है। तृतीय वेद यजुर्वेद है। जिसका उपवेद धनुर्वेद है। इस वेद में यज्ञों और युद्धों के विषय में बृहद रुप में वर्णित किया गया है। उस समय घातक, और विनाशक हथियार दिव्य मंत्रों से संचालित होता था। ऋषि भारद्वाज को वायुयान का जनक माना गया है। ऋषि कणाद को आणविक शक्तियों का जनक माना गया है। चतुर्थ वेद अथर्ववेद आता है। जिसका उपवेद शिल्पवेद है। इस वेद में तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, चमत्कार, वैज्ञानिक विधियां, जड़ी बूटी प्राकृतिक चिकित्सा का वर्णन किया गया है। वेद से ही हमें ज्योतिष विज्ञान का पता चलता है जो हमें खगोलीय घटनाओं के विषय से ज्ञान प्राप्त होता है। ब्रह्माण्ड में ग्रह, नक्षत्र, सूर्य, चन्द्रमा, आकाशगंगा आदि विषयों के बारे में हमारे पूर्वज हजारों साल पहले जान चुके हैं।आज जो हम यंत्रों के माध्यम से जानते हैं। हमारे ऋषियों ने वेद मंत्रों की शक्तियों से जानकारी प्राप्त कर लेते थे। ‘वेद’ ब्रह्मा और विज्ञान का स्वरूप है।
वेद से ब्रह्माण्ड के रहस्यमय खगोलीय विषयों के सन्दर्भ में सहजता से ज्ञानार्जन सम्भव है। ब्रह्माण्ड ज्ञाता के ऋषि कपिल को कहा गया है और खगोलशास्त्र के ज्ञाता वराहमिहिर को कहा गया है। वैदिक गणित के ज्ञाता ऋषि भास्कराचार्य है। रसायन वैज्ञानिक ऋषि नागार्ज हैं। हमारे देश की नदियों का संबंध वेदों से है। जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान वेदों से है। वेदों से ही हमारी सनातन संस्कृति अमर है।
साक्षात्कार के अंत में कवि सुनील चौरसिया सावन ने आचार्य असलम चतुर्वेदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित कर सावन साहित्य सेवा सदन, अटल नगर (अमवा बाजार), रामकोला, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में बहुत जल्दी वेद पर शास्त्रार्थ करवाने का ऐलान कर विद्वतजन को आमंत्रित किया।

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