सूबेदार मेजर (आनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव, परमवीर चक्र
वीरों की धरती उत्तर प्रदेश, जहां पुरुषोत्तम श्रीराम और योगेश्वर श्रीकृष्ण जैसे महान योद्धा, रणनीतिकार और जननायकों ने जन्म लिया और उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि समस्त भारत भूमि को गौरवान्वित किया। परमवीर आल्हा और ऊदल इसी प्रदेश की धरती पर पैदा हुए थे, जिनकी तलवार की खनक पूरे देश में “आल्हा खंड” के रुप में वर्षा ऋतु में गूंजती है । उत्तर प्रदेश को यदि वीरों की खान कहा जाय तो अतिशयोक्ति न होगी। आजादी से पहले और बाद में भी हमारे प्रदेश के वीरों ने युद्ध तथा शांति काल दोनों में अपनी वीरता से प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
इसी प्रदेश का जनपद बुलंदशहर जो कि “यथा नामे तथा गुणे” की कहावत को चरितार्थ करता है। युद्ध काल तथा शांति काल दोनों में ही इस जनपद के वीरों ने अपने शौर्य और पराक्रम से अपने जिले के नाम को बुलंद करते हुए प्रदेश के नाम को बुलंदी पर पहुंचाया है। इस जनपद ने देश को अब तक 01 परमवीर चक्र, 01 महावीर चक्र, 02 अशोक चक्र, 05 वीर चक्र, 01 कीर्ति चक्र तथा 04 शौर्य चक्र से सम्मानित योद्धा दिए हैं। उत्तर प्रदेश का यही वह जनपद है जिसके दो दो वीर सपूत गणतंत्र दिवस की परेड में परेड की अगुवाई करते हुए उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित करते हैं।
आज के ही दिन इसी जिले की माटी के लाल परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (आनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव ने वह कर दिखाया था जो कि आपरेशन विजय में निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। 12 जून 1999 को 18 ग्रेनेडियर्स ने तोलोलिंग की चोटियों पर तिरंगा लहरा दिया। इस यूनिट से हुए युद्ध में ज्यादातर पाकिस्तानी सैनिक मारे गये। तोलोलिंग के इस गुत्थम गुत्था के युद्ध में 18 ग्रेनेडियर्स को भी भारी क्षति उठानी पड़ी। इस लड़ाई में भारतीय सेना के 02 अधिकारी, 02 जूनियर कमीशन अधिकारी तथा 21 जवान वीरगति को प्राप्त हो गये।
18 ग्रेनेडियर्स की वीरता, साहस और क्षमता को देखते हुए सेना द्वारा टाइगर हिल पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में लेने की जिम्मेदारी इस यूनिट को दी गयी। यूनिट की कमान कर्नल कुशाल सिंह ठाकुर के हाथों में थी। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव अपनी यूनिट की घातक प्लाटून के सदस्य थे। 04-05 जुलाई की रात में टाइगर हिल पर स्थित तीन सामरिक बंकरों पर कब्ज़ा करने के लिए इस टीम को जिम्मेदारी दी गयी। इस पहाड़ी पर बंकर लगभग 17000 फुट ऊंची सीधी चढ़ाई पर थे। ग्रेनेडियर यादव स्वेच्छा से पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए कील गाड़ कर रस्सियों को बांध दिया। आधे रास्ते में स्थित पाकिस्तानी बंकर से मशीनगन से गोलियों की बौछार होनी शुरू हो गयी। जिसमें प्लाटून कमांडर और दो अन्य जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को भी गले और कंधे में गोलियां लगीं। गोलियां लगने के बावजूद वह शेष 60 फीट ऊपर चढ़कर बंकर तक पहुंच गये। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहले बंकर में घुस गए और एक ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। दुश्मन इस हमले से स्तब्ध रह गया। इससे बाकी प्लाटून को चट्टान पर चढ़ने का मौका मिल गया।
उसके पश्चात उन्होंने अपने दो साथी सैनिकों के साथ दूसरे बंकर पर हमला किया। गुत्थम गुत्था की लड़ाई में और चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। उनके साहस और वीरता के कारण उनकी प्लाटून टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने में सफल रही।
ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव वो जांबाज वीर थे जो कारगिल की जंग से 15 गोलियां लगने के बाद वापस लौटे थे। अदम्य साहस, अपूर्व शौर्य, पराक्रम, वीरता, कर्त्तव्य निष्ठा और जान की बाजी लगाकर देश की सेवा करने लिए उन्हें देश के सबसे बड़े वीरता सम्मान “परमवीर चक्र” से सम्मानित किया गया। बाद में वह पदोन्नत हो कर सूबेदार मेजर बने और 31 दिसंबर 2021 को मानद कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त हो गये।
सूबेदार मेजर (आनरेरी कैप्टन) (तब ग्रेनेडियर) योगेन्द्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को बुलंदशहर जनपद के गांव औरंगाबाद अहीर में श्रीमती संतरा देवी और श्री रामकरण सिंह यादव के यहां हुआ था। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल से तथा आगे की शिक्षा गांव में स्थित श्री कृष्ण इंटर कॉलेज से पूरी की और 27 दिसंबर 1996 को भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में भर्ती हो गये। ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर में प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात उनकी तैनाती 18 ग्रेनेडियर्स में हुई। इनके परिवार में इनके माता-पिता, इनकी पत्नी श्रीमती रीना यादव तथा दो पुत्र प्रशांत यादव और विशांत यादव हैं। इनके पिता श्री रामकरण सिंह यादव भी सेवानिवृत्त सैनिक हैं।
आपको बताते चलें कि ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव मात्र 19 वर्ष की आयु में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले देश के पहले योद्धा हैं। अब तक देश के कुल 21 वीरों को उनके वीरता और पराक्रम के लिए परमवीर चक्र प्रदान किया गया है जिसमें से 05 अकेले उत्तर प्रदेश के हैं । उत्तराखंड बनने के पश्चात परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा का पैतृक निवास उत्तराखंड में चले जाने के कारण उत्तर प्रदेश के 04 परमवीर चक्र विजेता प्रदेश को गौरवान्वित कर रहे हैं।
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर(आनरेरी)
लेखक

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